तनसुख कुमार
श्रीमाधोपुर
राजस्थान।
मो. 9351212400
Email tansukh.kumawat1977@gmail.com
शीर्षक - - आ सुरगां सू भी ठीक है
रामायण म पढी ज्यो म्हे
भगवान राम री सीख है।
जन्म भोम मायङ भूमी
आ सुरगां सू भी ठीक है ।।
आ सुरगां सू भी..............
आन, बान अर शान, वीरता
म पहलो स्थान है।
त्याग, शोर्य, बलिदान म आग
म्हारो राजस्थान है ।
देश र खातिर मर मिटने की
अठे पङी एक लीक है ।
जनम भोम............
शोर्य अठे राणा प्रताप रो
माँ पन्नाधाय री कुर्बानी
मेवाङ री आन पे जोहर करगी
पदमावती सागे क्षत्राणी ।।
जंग जीत कुछ पा सकया
मुगला म भी आ खीज है ।।
जनम भोम ..............
भक्ती रो रस लुटायो मीरा
कृष्ण प्रेम म दिवानी ।
महल हवेली आज कह रिया
शिल्प कला री कहानी।
गणगोर मनावां चाव सू
त्योहार म्हारों तीज है ।।
जनम भोम ...........
कुमार तनसुख
Shandaar
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteजी शुक्रिया
Deleteजी शुक्रिया
DeleteSuper.....
ReplyDeleteNice bhaiji
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteNice bhaiji
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteBhut khoob
ReplyDeleteBahut hi shandar bhai
ReplyDeleteVery beautiful
ReplyDeleteशानदार शब्दों का चयन एवं जीवन्तता लिए हुए बेहतरीन कविता।
ReplyDeleteवाह जी शानदार ।
ReplyDeleteजी शुक्रिया
Deleteबहुत शानदार...
ReplyDeleteपूर्ण जोश और आत्मविश्वास से आगे बढ़िये 👌👌
Very nice poem
ReplyDeleteAap yohi rajasthani ro Yas gungan gaate rho
Ghani- ghani khamma
Bahut acha likhate hai aaap
ReplyDeleteबहुत शानदार, बहुत बहुत बधाई ����
ReplyDeleteबहुत शानदार, बहुत बहुत बधाई ����
ReplyDeleteआपका प्रयास हमारी मातृभाषा के उत्थान के लिए एवं वीर भोग्या राजस्थानी वसुन्धरा के लिए एक बढ़ता हुआ सराहनीय और भक्तिरस का पदसोपान हैं।
ReplyDeleteSo please, keep it up and encourage another to it.
Bahut aannad aaya bhut Sachin racna
ReplyDeleteजय जय राजस्थान
ReplyDeleteबहुत अच्छी कविता है जी
शानदार, बहुत बहुत बधाई 🌹🌹
ReplyDeleteसुरेन्द्र कुमार चेजारा
ReplyDeleteशानदार, बहुत बहुत बधाई ����
सुरेन्द्र कुमार चेजारा
ReplyDeleteशानदार, बहुत बहुत बधाई ����
शानदार, बहुत बहुत बधाई 🌹🌹
ReplyDeleteबहुत उम्दा । अच्छा प्रयास है । कुछ पंक्तियां वाकई दोहराने योग्य है ।
ReplyDeleteजन्म भोम मायङ भूमी
आ सुरगां सू भी ठीक है ।।
साधुवाद ।
बहुत उम्दा । अच्छा प्रयास है । कुछ पंक्तियां वाकई दोहराने योग्य है ।
ReplyDeleteजन्म भोम मायङ भूमी
आ सुरगां सू भी ठीक है ।।
साधुवाद ।
Bahoot hi badiya excellent
ReplyDeleteBadiya Mast ✌✌👌👌👌👌🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteबहुत शानदार और अच्छी रचना.. शुभकामनाएं आपको
ReplyDeleteबेहद ख़ूबसूरत रचना...गाँव की की सुगंध आ रही है।
ReplyDeleteराजस्थान और मातृभाषा का अदभुत मेल ह।।।
ReplyDeleteबहुत खूब सा
ReplyDeleteNyc
ReplyDeleteNice rcna bhai ji
ReplyDeleteबहुत ही अच्छा लिखते हो सर आप, उम्मीद है ऎसे ही अच्छी कविताए और लेख लिखते रहोगे, आपके उज्जवल भविष्य की कामनाओ सहित आपका छोटा भाई
ReplyDeleteबहुत सुंदर 😊👌 बहुत अच्छा लिखते हो सखा 😊 ढेरों शुभकामनये 🙏
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर और ओजस्वी पूर्ण शब्दो से वीर भोग्य का महत्व बताया है
ReplyDeleteबहुत ही शानदार व सराहनीय प्रयास है
ReplyDeleteकविता में शानदार शब्दों का चयन किया है आपने,
ReplyDeleteमातृभूमि के प्रति प्रेम, भक्ति रस से परिपूर्ण साथ में
रीति रिवाजों की अच्छी प्रस्तुति दी हैं।
आपका ये प्रयास सफल हो(Bindu kumawat)💐💐👍
हमेशा की तरह ....लाज़वाब
ReplyDeleteShandar Superb
ReplyDeleteShandar Superb
ReplyDeleteBhaut bhadiya, hamasha ki taraha ya bhi lajavab hai. Asa hi likhta raho kuch dhundla hota aasas yad aa jata hai.
ReplyDeleteComment with your Google account if you’d like to be able to manage your comments in the future. If you comment anonymously, you won’t be able to edit or delete your comment.
ReplyDeleteBhaut bhadiya, aasa hi likhta raho. Jo aasas dhundla ho gaya hai unki yaad aa jati hai.
ReplyDeleteबहुत ही अच्छी तरह से राजस्थान की वीरभूमि का वर्णन किया है.
ReplyDeleteSandar bahut khoob...
ReplyDeleteVry nice bhai ji
ReplyDeleteJai Jai Rajasthan
ReplyDeleteSuper
ReplyDeleteMasttt ��������
ReplyDeleteभोत जोरदार भाई
ReplyDeleteSuperb ji......
ReplyDeleteBahut accha likha h bahishab aapne.....
ReplyDeletevery nice Bhai ji. ...
ReplyDeleteसाहस,बलिदान,शौर्य,रमणीयता रो पर्याय म्हारो राजस्थान
ReplyDeleteकेसरिया बालम,पनिहारी,बणीठणी री पहचान म्हारो राजस्थान।
काकाश्री की सुरम्य रचना। जय हो।
Vry nice 🌹👌
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteबहुत खूब लिखा है आपने very nice
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