नाम--सुनीता लुल्ला
राज्य---तेलंगाना
शीर्षक---गीत
मोबाइल---
नाम--सुनीता लुल्ला
राज्य---तेलंगाना
शीर्षक---गीत
मोबाइल---
गीत
मुहब्बतों का करम है कि जाँ निसार चले
तुम्हारी राह पे हम बार बार बार चले
तुम्हारी राह पे हम बार बार बार चले
ये बात किससे भला कह के हम यूँ बतलाते
जो जख़्म सूख चले थे उन्हें क्या जतलाते
कभी जो खुशबू तुम्हारी हमें भी छू जाये
गुज़र के पास से जैसे कोई बहार चले,,,,
जो जख़्म सूख चले थे उन्हें क्या जतलाते
कभी जो खुशबू तुम्हारी हमें भी छू जाये
गुज़र के पास से जैसे कोई बहार चले,,,,
मगर सफ़र में तन्हाइयों का आलम था
सुकून कोई नहीं इक अजब सा मातम था
कोई नग़्मा भी पास आते हुए डरता था
करार तुम थे मगर हम तो बेकरार चले,,,
सुकून कोई नहीं इक अजब सा मातम था
कोई नग़्मा भी पास आते हुए डरता था
करार तुम थे मगर हम तो बेकरार चले,,,
वो रहगुज़र जो कहीं थम गयी सी लगती थी
तलाश मंज़िलों की जम गयी सी लगती थी
तभी कहीं से लगा बादे सबा आई है
तुम्हारा साथ मिला हम कदम हज़ार चले,,,,
तलाश मंज़िलों की जम गयी सी लगती थी
तभी कहीं से लगा बादे सबा आई है
तुम्हारा साथ मिला हम कदम हज़ार चले,,,,
✍✍ सुनीता लुल्ला
सुंदर गीत
ReplyDeleteसुन्दर रचना
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