कवि का नाम बजरंग दान चारण
राज्य राजस्थान
निवासी - नाथूसर ,बीकानेर
कविता का शीर्षक - आत्महत्या पाप है
मोबाइल नम्बर 8949410152
आत्महत्या पाप है
जो कुछ भी है तुम वहन करो
अब डर जाने से क्या होगा
हंसकर सुख की राहे खोजो
गम में रोने से क्या होगा
हर राहो में हाथ पसारो
बैठे रहने से क्या होगा
जीना है तो हंसकर जीओ
रो रो मरने से क्या होगा
कठिन परिस्थिति है मगर
घबराने से क्या होगा
हर पहेली का हल निकलेगा
डर जाने से क्या होगा
जीवन सघर्ष का मेला
मर जाने से क्या होगा
जो भी है हासिल
सहर्ष अंगीकार करो
जीवन बड़ा अनमोल है
इससे हरपल प्यार करो
कांटों की डगर से घबरा रहे हो
मुस्किल सफर से कतरा रहे हो
क्या जिन्दगी इतनी सस्ती है
क्यों हस्ती मिटाने जा रहे हो
जीवन में आ जाये अगर
कष्टों का सेलाब
दिखने लगे चारों ओर
संताप ही संताप
मानुष जीवन है अनमोल बंदे
संताप क्षणिक भाप है
ये सीख रखना याद बंदे
आत्महत्या पाप है
जब धैर्य डगमगाए
हिम्मत हारने लगे
आत्मा झकझोर जाए
वक्त थपेडा़ मारने लगे
अन्तर्मन टूटकर कहे
बिखरने का वक्त है
तब खुद को समझा कि अब
निखरने का वक्त है
जब तन्हा दिल
दर्द उकेरने लगे
निराशा के घनघोर बादल
तुम्हे घेरने लगे
तब कहना खुद को हे जीवन
तेरी जंग स्वीकार मुझे
भागूंगा नहीं छोड़कर
है जीवन तुझसे प्यार मुझे
जब दुनिया बेगानी लगे
खुद को समझाना मुस्किल हो
हर उम्मीद पर पानी बहे
जग अलविदा कहने को दिल हो
तब समझाना की जीवन
संचित पुण्यों का प्रतिफल होता है
इसे छोड़कर आधा अधूरा
जाने वाला कायर होता है
चाहे प्यार में धोखा खाकर
अरमान बिखर गए हो सारे
चाहे नैया फसी भंवर में
दिखते हो न कोई किनारे
तहस नहस हो गया हो सारा
तब भी झुझारू हिम्मत जुटाना
ये जीवन मिले न दोबारा
तुम पुनर्सृजन का भाव सजाना
तुम अमृतमय जीवन को
विरान मत करना
तुम स्वार्थी बन बगिया
श्मशान मत करना
जिन्दगी से बढ़कर कोई
दौलत नहीं
wow..great poem
ReplyDeleteसुपर , कविता वही जो समाज को कोई राह दिखाए , शाबाश कविवर
ReplyDeleteबहुत ही शानदार गुरुदेव
ReplyDeleteBajrang ji sandaar kavita well done
ReplyDeleteआत्महत्या प्रवृति को हतोत्साहित व जीने को प्रेरित करती हुई उत्कृष्ट कृति। (एस.के.कुमावत सर) जिजोट कुचामन।
ReplyDelete👌👌ये कविता किसी व्यक्ति या विद्यार्थी को उसको नया जीवन दे सकती है जो अपने लक्ष्य से भटक गया हो... शानदार बहुत ही बढ़िया... Proud of You sir ji😙✌
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