१ कवि - गोविन्द सिंह राव
२ शीर्षक - मेरी प्राण प्रिये ।
३ सम्पर्क - ९७७२६६३८१८
४ राज्य - राजस्थान
🌹मेरी प्राण प्रिये 🌹
जीवन का संगीत अधूरा ,
तुम बिन मेरा प्राण प्रिये।
जीवन का हर गीत अधूरा ,
तुम बिन मेरा प्राण प्रिये ।
तुम बिन सुर सजे ना मेरा
तुम बिन कोई राग बने ।
तुम बिन कैसे गीत बने कोई ,
बिना जगे अनुराग प्रिये ।
जीवन का संगीत अधूरा ,
तुम बिन मेरा प्राण प्रिये ।
तुम बिन कैसे गजल लिखूं,
कैसे गाऊं कविता कोई ।
जब तक ना देखू मै तुझको,
सुन्दर सा श्रंगार किये ।
जीवन का संगीत अधूरा ,
तुम बिन मेरा प्राण प्रिये।
तुम को ढूंढू तन्हाई में ,
मै गीतो और रुबाई में ।
न जाने क्यों तुम रूठ गई हो,
अब लौट भी आओ प्राण प्रिये।
जीवन का संगीत अधूरा ,
तुम बिन मेरा प्राण प्रिये।
जीवन का हर गीत अधूरा ,
तुम बिन मेरा प्राण प्रिये ।
रचयिता - गोविन्द सिंह राव
धुम्बाडीया,जालोर
राजस्थान
आभार
ReplyDeleteअनुपम कृति,बधाई आदरणीय
ReplyDeleteशुक्रिया जी
DeleteBahut khub
ReplyDeleteआभार
Deleteआभारी
DeleteThanks
DeleteSupper
ReplyDeleteThank u very much
Deleteअतिसुन्दर कविता लिखी है आपने धन्यवाद
ReplyDeleteशुक्रिया
DeleteThrough poetic medium you have written a very good poem, the above poem gives the message that all the family members are very well connected and friendly.
ReplyDeleteBhut badiya congregation
ReplyDeleteSandar Bhai sab
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