कवयित्री -सावित्री मिश्रा
सम्पर्क -
शीर्षक -आवाज
राज्य -,ओडिशा ,झारसुगुड़ा
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राज्य -,ओडिशा ,झारसुगुड़ा
आवाज
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आवाज की अनुगूँज गुंजित हो रही है,
हर जगह उठता धुआँ बारूद का।
हर कदम बढने लगे शमशान तक,
हर जुबान कहने लगी गम की सदा।
हर नजर मे आज बस सन्त्रास है,
क्यों हुई कैसे हुई ऐसी दशा ?
बोल कुछ तो बोल मन मे तौल कर,
शब्द की शक्ति अनर्गल ना बहा।
शब्द ही है ब्रह्म यह ही है सुधा,
अपनी कोई कुण्ठा अपनी कोई गरज।
अपने कोई अरमान कोई अपनी क्षुधा,
जब नही मिट पाई और बढती गई ।
कर दिये विष का वमन उँचाई से,
वायु लेकर उड़ चली चहुँ ओर है ।
देख इसका हस्र सेको हाथ धधकी चिता,
खो चुके हैं जो लाल माता पिता।
डरो उनकी आह से ए बेशरम ,
कर सको तो करो कुछ ऐसा करम।
मिटे मन का क्षोभ घटे वैमनश्यता,
सो रही जो जाग उठे वो मनुष्यता ।
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आवाज की अनुगूँज गुंजित हो रही है,
हर जगह उठता धुआँ बारूद का।
हर कदम बढने लगे शमशान तक,
हर जुबान कहने लगी गम की सदा।
हर नजर मे आज बस सन्त्रास है,
क्यों हुई कैसे हुई ऐसी दशा ?
बोल कुछ तो बोल मन मे तौल कर,
शब्द की शक्ति अनर्गल ना बहा।
शब्द ही है ब्रह्म यह ही है सुधा,
अपनी कोई कुण्ठा अपनी कोई गरज।
अपने कोई अरमान कोई अपनी क्षुधा,
जब नही मिट पाई और बढती गई ।
कर दिये विष का वमन उँचाई से,
वायु लेकर उड़ चली चहुँ ओर है ।
देख इसका हस्र सेको हाथ धधकी चिता,
खो चुके हैं जो लाल माता पिता।
डरो उनकी आह से ए बेशरम ,
कर सको तो करो कुछ ऐसा करम।
मिटे मन का क्षोभ घटे वैमनश्यता,
सो रही जो जाग उठे वो मनुष्यता ।
सावित्री मिश्रा
झारसुगुड़ा ,ओडिशा
झारसुगुड़ा ,ओडिशा
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