Sunday, September 1, 2019

बिहार से कवयित्री कंचन प्रभा की प्रकाशित कृति- तुम हो शायद

कवयित्री का नाम- कंचन प्रभा (शिक्षिका)
शीर्षक- तुम हो शायद!
राज्य-बिहार
सम्पर्क-
         तुम हो शायद
रसोईघर के दरीचे में
   केले के पत्तों के बीच
मुझे लगा तुम हो शायद!
  दरवाजे की खरखड़ाहट में
पर्दे के उस पार खड़े
मुझे लगा तुम हो शायद!
खाने के टेबल पर या
  शाम की चाय पर
मुझे लगा तुम हो शायद!
चरागों के उजाले में
  परछाईं मध्यम आकृति की
मुझे लगा तुम हो शायद!
आईने में खुद को देखना
  देख कर दिल का धड़कना
मुझे लगा तुम हो शायद!
खुदा की बन्दगी में
  आँखे बन्द करने पर
मुझे लगा तुम हो शायद!
        ✍  कंचन प्रभा
          दरभंगा बिहार ✍

29 comments:

  1. Bahut hi aacha sabdo ka chayan v. Good

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  2. Good and meaningful. Keep posting
    Shikha

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  3. Nice and meaningful... Posting ruby

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  4. तुम हो, क्या खुब लिखा है

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