कवयित्री का नाम- कंचन प्रभा (शिक्षिका)
शीर्षक- तुम हो शायद!
राज्य-बिहार
सम्पर्क-
शीर्षक- तुम हो शायद!
राज्य-बिहार
सम्पर्क-
तुम हो शायद
रसोईघर के दरीचे में
केले के पत्तों के बीच
मुझे लगा तुम हो शायद!
केले के पत्तों के बीच
मुझे लगा तुम हो शायद!
दरवाजे की खरखड़ाहट में
पर्दे के उस पार खड़े
मुझे लगा तुम हो शायद!
पर्दे के उस पार खड़े
मुझे लगा तुम हो शायद!
खाने के टेबल पर या
शाम की चाय पर
मुझे लगा तुम हो शायद!
शाम की चाय पर
मुझे लगा तुम हो शायद!
चरागों के उजाले में
परछाईं मध्यम आकृति की
मुझे लगा तुम हो शायद!
परछाईं मध्यम आकृति की
मुझे लगा तुम हो शायद!
आईने में खुद को देखना
देख कर दिल का धड़कना
मुझे लगा तुम हो शायद!
देख कर दिल का धड़कना
मुझे लगा तुम हो शायद!
खुदा की बन्दगी में
आँखे बन्द करने पर
मुझे लगा तुम हो शायद!
आँखे बन्द करने पर
मुझे लगा तुम हो शायद!
✍ कंचन प्रभा
दरभंगा बिहार ✍
दरभंगा बिहार ✍
Wowwww..... Bohot hi achha hai
ReplyDeleteThanks dear
DeleteBahut hi aacha sabdo ka chayan v. Good
ReplyDeleteGood and meaningful. Keep posting
ReplyDeleteShikha
Thanks dear
DeleteBahut hi Accha
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
DeleteKeep it up ese hi likhte raho
ReplyDeleteThanku
DeleteVery nice
ReplyDeleteThanku
DeleteNice and meaningful... Posting ruby
ReplyDeleteThanku
DeleteVery nice line
ReplyDeleteThanku
DeleteNice poem
ReplyDeleteThanku
DeleteBhutkub
ReplyDeleteThanks dear
Deleteतुम हो, क्या खुब लिखा है
ReplyDeleteधन्यवाद्
DeleteNyc creation
ReplyDeleteThanku
DeleteAwsm
ReplyDeleteThank u
DeleteSandar kavita
ReplyDeleteधन्यवाद्
DeleteVery nice
ReplyDeleteRitu
Thanks ritu
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