कवि राजकुमार पाण्डेय
शीर्षक निर्धन की बेटी
राज्य छत्तीसगढ़
जिला उ ब कांकेर
संपर्क 9691442209
असमय हुई जवान, निर्धन की बेटी,
यथा जेठ की घाम, निर्धन की बेटी।
कोई ताना मारे, कोई करे इशारे,
गडी सभी की आँख, निर्धन की बेटी।
यथा जेठ की घाम निर्धन की बेटी।
इसको किया नमस्ते, उसके पालागी,
रखे सभी का मान, निर्धन की बेटी।
यथा जेठ की घाम निर्धन की बेटी।
किससे बचकर चलना, किसको आँख दिखाना,
सीखी अपने आप, निर्धन की बेटी।
यथा जेठ की घाम, निर्धन की बेटी।
कठिन कर्म की गीता, अनुभव के षट दर्शन,
सीखी, हुई सयान, निर्धन की बेटी।
यथा जेठ की घाम, निर्धन की बेटी।
कवि राजकुमार पाण्डेय 🙏🏻🙏🏻
Sunday, September 1, 2019
छत्तीसगढ़ से कवि राजकुमार पाण्डेय निर्धन की बेटी
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बहुत सुंदर कविता👌👌
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