Sunday, September 1, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि अजयशेखर नेताम "नैऋत्य" की कृति- हमर छत्तीसगढ़ीया तिहार

कवि - अजयशेखर नेताम "नैऋत्य"   
शिर्षक - हमर छत्तीसगढ़ीया तिहार
पता - अमलोर, जिला - महासमुंद
राज्य - छत्तीसगढ़
सम्पर्क सूत्र - 9907380520

       ★ हमर छत्तीसगढ़ीया तिहार★
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होथे आषाढ़ में रदुतिया संगी,
जेकर पन्द्राही बाद हरेली।
बरसत पानी मे धोथे नांगर,
चूहे छानी बरेंडी।।

धोये मांजे नांगर जुड़ा ला,
टांग दे नाहाना ल खूंटी।
भाई बर रक्षा करथे रक्षाबंधन,
दीदी बर माया म ले ले सांटी।।

अठवाही के बीते ले लइका मन,
रुख मा झूलना बांध के झुलथे।
सुरुज चन्दा ला कोठ मा छापे,
डोंगा में बिराजे गोकुल आठे।।

आठेच दिन ला जवान दे संगी,
नदिया बईला सजाबो जोड़ा-जोड़ा।
दाई ला गोहरात हे नोनी,
मोरो बर ले दे ना जांता बोरा ।

तीन दिन गांव भर घूमे, लेवय सबो के तिजहा,
सही सही ला किहिस पवन सब, दुख ले तन होंथे सिजहा।
रोज रोज कहा मिलथे, मइके के कोरा,
इही ला तो कहिथे संगी तीजा अउ पोरा।।

तीजा के बिहान दिन गणेश चतुर्थी,
होथे ग्यारा दिन बाद,सबो घर पितर के उतरी।
पितर के होथे बिदा आथे जी नवराती,
नव दिन ले जगमग बरे मंदिरवा में दियाबाती।।

नव दिन ले लिल्ला खेले,
दसवा दिन दसेला।
नवा आगे अन्नकुवारी दाई,
नवा खाये सबो माई पिला।।

साफ सफाई करन लगे,
लीपा पोती घर दुवारी।
बीसे दिन बाद आगे,
लक्ष्मी पूजा अउ देवारी।।

पन्द्राही पन्द्राही में तिहार निकल गे,
अइसे गिनत है भौजी।
सूधे सूधे मा सबके बुता उसरगे,
बिहिनिया ले संझौती।।

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अजयशेखर नेताम "नैऋत्य"
अमलोर (महासमुंद)

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