*दोहा छंद*
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जननी है मां पार्वती, जनक है महादेव l
जिनके पुत्र गणेश हैं, दया करते सदैव ll
कण कण भी है बोलता, देखो कैसे आज l
दुख हरने हे देव तुम,आ जाओ गणराज ll
हे गणेश गणराज तुम, दे दो हमको ज्ञान l
अपने पथ पर चल सके, मिले दया का दान ll
चरणों के हम धूल हैं, तुम तो हो भगवान l
भेद कभी करते नहीं, रखते जग का मान ll
आज नहीं तो कल सही, बने यहां पहचान l
सेवा करके देश का,हो जाएं बलिदान ll
*रचनाकार-*
भास्कर वर्मा "उमंग"
छात्र- शा. उ. मा. विद्यालय बुड़ेनी (छत्तीसगढ़)
मो. न. 6268812376
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