Monday, September 23, 2019

दरभंगा (बिहार) से डॉ०पूनम झा की रचना- बेटा

कवयित्री  - डॉ०पूनम झा
शीर्षक - बेटा
राज्य - दरभंगा (बिहार)
सम्पर्क- 
                बेटा
★★★★★★★★★★★★
राह में मिला एक अन्जाना
देखकर लगा कई  वर्षों
का है जाना-पहचाना।
वह मुझे निहारा और मैं उसे
यह सिलसिला जारी था,
दूर एक झाड़ी था।
अब मैं आगे बढ़ी
और सोचने लगी,
उसके चेहरे मायूस थे,
वह खामोश था
किन्तु, उसके मन में
एक जोश था।
आखिर वह कौन था?
जो बिल्कुल मौन था।
इसी ऊहा-पोह में मैं पड़ी रही
मनन और चिन्तन के गहन अध्ययन में लगी रही।
तभी मन को झटका लगा
दरवाजे़ पर खटका लगा।
फिर से, वही अन्जाना खड़ा
मुझे निहारा
और कहा - माँ तुम मेरी माँ हो।
उसकी दर्द-भरी आवाज़ की साज़
सुन मेरे भाव विह्वल हुए
बहने लगे नीर
और बढ़ने लगे पीड़
उसे गले लगा कहने लगी
अन्जाना कोई और नहीं
मेरा बेटा अपना था ।।
                डॉ० पूनम झा
              दरभंगा(बिहार)


1 comment:

  1. वाह वाह आपका बेटा है सायद इस कविता मे👌

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