रचना-कन्हैया साहू 'अमित'
राज्य-छत्तीसगढ़
विधा-दोहा छंद
संपर्क-9200252055
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*दोहे का दोहा (दोहा विधान)*
गागर में सागर भरे, दोहा छंद प्रवीर।
दिखने में छोटा अमित, घाव करे गंभीर।।-1
तेरह ग्यारह गिन लिखें, अनुपम दोहा छंद।
कुल मात्रा चौबीस से, उपजेगा आनंद।-2
ग्यारहवीं मात्रा अमित, रखें सदा लघु भार।
दोष रहित होगा सृजन, दोहा फिर दमदार।-3
शब्द चयन आधार है, कल संयोजन प्राण।
विषम विषम सम साधिए, होगा तब कल्याण।-4
चार चरण दो पद सहित, दोहा अति अभिराम।
एक तीन दो चार का, यहाँ विषम सम नाम।-5
आदि जगण मत राखिए, करता यह व्यवधान।
उचित जगह यति गति लगे, रहे यही बस ध्यान।-6
विषम चरण लघु गुरु अमित, रखें चरण के अंत।
मात्राओं के ज्ञान से, भाव सृजन सुखवंत।-7
चरण अंत सम का रखें, गुरु अरु लघु अनिवार्य।
मूल मंत्र दोहा अमित, विधि सम्मत स्वीकार्य।-8
दोहा रचना है सहज, इसका सरल विधान।
अमित सतत अभ्यास ही, देता अतुलित मान।-9
रखिये रचना में सदा, उत्तम उचित तुकांत।
मात्रा गणना हो सही, इति दोहा सूत्रांत।-10
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कन्हैया साहू "अमित"
शिक्षक भाटापारा छत्तीसगढ़
सादर आभार यादव जी।
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