Tuesday, September 17, 2019

रांची (झारखंड) से कवयित्री डॉ अलका कुमारी की प्रकाशित रचना- मातृत्व की गहराई

नाम- डॉ अलका कुमारी
राज्य- रांची (झारखंड)
संपर्क-
शीर्षक- मातृत्व की गहराई
        मातृत्व की गहराई
 
वो  मेरे,
नन्हे कदम, नन्ही अठखेलियाँ
था मेरा वो बेपरवाह बचपन
पर आज,
माँ बनी तो जाना
माँ के निःस्वार्थ,  निश्छल प्रेम
और मातृत्व की गहराई।
नौ महीने की तड़प,
थोड़ा उलझन थोड़ी गुदगुदाई
शब्द छोटा पर सारा संसार
है इसमे समाई।
माँ बनी तो जाना
मातृत्व की गहराई।
माँ के उस फटकार पर,
माँ के उस दुलार पर,
माँ के उस दोस्ताना व्यवहार पर,
कभी आया प्यार,
तो कभी चिड़चिड़ाई।
पर माँ बनी तो जाना
मातृत्व की गहराई।
माँ होती है हमारी परछाई,
कुदृष्टि से बचाकर
ले लेती सारी बलाई।
अपने आँचल मे समेटे,
सारी खुशियाँ,
निःस्वार्थ,  प्रेम है लुटाई
पर आज माँ बनी तो जाना
मातृत्व की गहराई।
निलय स्वरूप लक्ष्मी बनी
शावक के लिए रुद्र अपनाई
संपूर्ण समाज से डटकर किया सामना
सही हजार रुसवाई
आज माँ बनी तो जाना
मातृत्व की गहराई।
कश्मीर घुमा, घुमा मोरीशास्,
घुमा देश विदेश,
पुलकित हुआ जब मै पाई
खुद  मे तेरा समावेश।
आज  बनी तो माँ जाना
मातृत्व की गहराई।
तेरे आँचल तले
सारी दुनियाँ बिसराई,
आज तेरी वो सारी बाँतें,
हर पल याद मुझे है आई
आज बनी तो माँ जाना
मातृत्व की गहराई।
      ✍
डॉ अलका कुमारी

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