Monday, September 16, 2019

बिहार(दरभंगा) से कवयित्री कंचन प्रभा की रचना-भूखमरी

कवयित्री-कंचन प्रभा
राज्य-बिहार(दरभंगा)
कविता- भूखमरी
सम्पर्क-
          *भूखमरी*
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भूखमरी की वह सूरत जो
देखी उस गरीब ने
आँखो की पलकों पर
समन्दर सा बह गया था।
एक रोटी और एक लत्ता
एक मकान कि खातिर उसने
अपना जमीर अपनी इज्जत
अपनी बेइज्जती सह गया था।
झोपड़ी में जलती उस
मध्यम से दीपक में
पिघलता रहा जर्रा जर्रा और
शरीर ढाँचा ही रह गया था।
भूखमरी ने उसकी सूरत
बिगाड़ दी इस कदर
गली ,मुह्हला, किस्मत
सब उसे पागल कह गया था।
बच्चों की वेदना में घुल कर
हृदय में जलजला सा आया
और मन के धरातल पर
चार मंजिला इमारत ढह गया था।
       ✍ *कंचन प्रभा*
         *दरभंगा बिहार* ✍

54 comments:

  1. अति उत्तम रचना। बेहद उम्दा शैली।

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  4. Heart touching Wonderful lines

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  5. Heart touching lines 👍👍👌👌

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