कवि का नाम -- महेन्द्र देवांगन माटी
शीर्षक -- मोहनी
राज्य -छत्तीसगढ़
संपर्क - 8602407353
*मोहनी*
शीतल जल में बदन भिगाकर , मन में आग लगाती हो ।
नयनों से तुम बाण चलाकर , दिल घायल कर जाती हो ।।
काली काली जुल्फों को तुम, नागिन सी लहराती हो ।
मधुर मधुर मुस्कान फेंककर, कितनों को डस जाती हो ।।
पाँवों की पायल झनकाकर , दिल में शोर मचाती हो ।
हाथों की कंगन खनकाकर , सबको नाच नचाती हो ।।
कोयल सी मीठी बोली से , सम्मोहन कर जाती हो ।
क्या जादू है पास तुम्हारे , दिल को बहुत लुभाती हो ।।
गोरे मुख पर काला तिल है , मोहनी रुप दिखाती हो ।
मैं तो सीधा सादा बंदा , सपने में क्यों आती हो ।।
*महेन्द्र देवांगन माटी* ✍
*पंडरिया छत्तीसगढ़*
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अतिसुन्दर
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