१. कवि- विश्वनाथ देवांगन"मुस्कुराता बस्तर"
२. शीर्षक- 'रोटी'
३. सम्पर्क- 07999566755
४. राज्य- छत्तीसगढ़
"रोटी....."
!
चिमनियों से,
निकलता धुंआ |
गंदी बस्तियों में,
उड़ती धूल |
काले मटमैले बदन,
चेहरे पर कालिख |
कीचड़ की,
छप-छप आवाज |
भोंपू का कर्कश स्वर,
मजदूरों की,
अलसाई हुई आवाजें |
मजदूरों के,
कांपते हुए शरीर |
हवा में गालियों की गूंज,
मशीनों की गड़गड़ाहट,
फक-फक की आवाजें |
निर्मम कांपते,
हवा में तैरते स्वर |
ऊँची-ऊँची काली,
चिमनियों के बीच |
कठोर-निराशापूर्ण,
भ्रांति प्रतीत माहौल |
मुगदरों की भांति,
खड़े शोषक चिमनी |
अस्त होते,
सूरज का लाल प्रकाश |
झोपड़ी में,
चूल्हों को निहारता |
कचरों के ढेर में,
आशियानों की बस्ती |
चूल्हों तक ,
खूले आकाश की नजर |
फैक्ट्री से,
निकलकर चलते मजदूर |
कालिख पुते,
चेहरों पर दांतों की चमक |
भूखे नीरस,
उत्साहित शाम की तलब |
शरीर से,
मशीन के तेल की बदबू |
फिर भी,
आराम को बाट जोहते नजर |
जीवन का एक दिन,
कम होने का अफसोस |
हर रोज,
रोटी की नई प्रपंच |
आज की रोटी पच गई,
आज का दिन,
फैक्ट्री निगल गई |
उम्मीद के साथ,
गहरी नींद आती है |
कल,
फैक्ट्री में बनेगी,
फिर से रोटी नई ||
✍ ©® *मुस्कुराता बस्तर*
कोंडागांव(बस्तर)छत्तीसगढ़
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