Tuesday, September 10, 2019

छत्तीसगढ़(कोण्डागाँव) से कवि गिरिजा प्रसाद पाण्डे की कविता- तुम्हारी यादें

1.कवि का नाम - गिरिजा प्रसाद पाण्डे
2.शिर्षक - "तुम्हारी यादें"
3.राज्य - छत्तीसगढ़(कोण्डागाँव)
4.सम्पर्क - 9691760909

              "तुम्हारी यादें"

ओ हर बात उन बातों की बातें,
भुल गये ओ दिन क्या भुलगये ओ रातें।
पर मैं कैसे भुलूं ओ तेरी चाहत की बातें,
बहुत याद आती है मुझे,तुम और तुम्हारी यादें।।

मैने तो सम्भाले रखा है,
तेरी हर एक बातें,
अल्फाज हो तेरे इश्क के,
तो हम जनाजे से उठजाते।
पर हुई बात रुसवाई की,
अच्छा होता हम जमाने से उठजाते,
बहुत याद आती है मुझे,
तुम और तुम्हारी यादें।।

ग्रीष्म की तपति धुप हो,
या हो सावन की बरसातें,
पानी की शितल जल न हो,
या न हो बारीश में छातें।
परन्तु ख्वाबों मे होती,
हमारी हर रोज मुलाकातें,
बहुत याद आती है मुझे,
तुम और तुम्हारी यादें।।

कोयल की तान मधुर हो,
या हो चिड़ीयों की चह चहातें,
कारी अंधियारी रात हो,
या हो तारों से सजी रातें।
मन में नित सहनाई बजे,
चलुं मैं संग चलती हैं बारातें,
बहुत याद आती है मुझे,
तुम और तुम्हारी यादें।।

ढलती मख्मली सांझ हो,
या हो सुरमयी शुप्रभातें,
दिल के उपवनी बगीया में,
आशिकी के भैरें हैं गुनगुनातें।
मन में नयी उमंग लिये,
पुनः बात यही दुहराते,
बहुत याद आती है मुझे,
तुम और तुम्हारी यादें।।

               गिरिजा प्रसाद पाण्डे
                कोण्डागाँव(बस्तर)

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