Monday, September 2, 2019

बिहार से कवि रूपेश कुमार की गज़ल

कवि ~ रूपेश कुमार
शीर्षक ~ गजल
राज्य ~ बिहार
मोबाइल ~ 9934963293

~~~~ गजल ~~~~

उनकी बातो पर हम तो चले जा रहे है ,
अपने कंधो पर अर्थी लिये जा रहे है !

न सोचते समझते कितने मुढ हम है ,
प्रेम के बोल पर हम लूटे जा रहे है !

उनके वादो का कोई भरोसा नहीं ,
मेरी नजरो से अब तो छूपे जा रहे है !

मंच खाली अभी है किस ऊर्वशी का ,
मेनका की नजरो मे बसे जा रहे है !

अब आयेगी मन मे बसी लाडली ,
सपने कुँवारे सजे जा रहे है !

कवि - रूपेश कुमार

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