कवि ~ रूपेश कुमार
शीर्षक ~ गजल
राज्य ~ बिहार
मोबाइल ~ 9934963293
~~~~ गजल ~~~~
उनकी बातो पर हम तो चले जा रहे है ,
अपने कंधो पर अर्थी लिये जा रहे है !
न सोचते समझते कितने मुढ हम है ,
प्रेम के बोल पर हम लूटे जा रहे है !
उनके वादो का कोई भरोसा नहीं ,
मेरी नजरो से अब तो छूपे जा रहे है !
मंच खाली अभी है किस ऊर्वशी का ,
मेनका की नजरो मे बसे जा रहे है !
अब आयेगी मन मे बसी लाडली ,
सपने कुँवारे सजे जा रहे है !
कवि - रूपेश कुमार
No comments:
Post a Comment