कवि- शंकर गोयल
शीर्षक- जूते की महिमा
राज्य-छत्तीसगढ़
संपर्क-7099484610
shankar.pithora@gmail.com
@Goyalshankar
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°जूते की महिमा°
जूती पैरों में ही ,
अच्छी लगती है सिर पर नहीं।
इस कहावत के प्रत्युत्तर में,
जूती ने कहा -
मानव का इतिहास गवाह है,
जितना पुराना उसका,
उतना मेरा भी इतिहास है,
इंसान डरता है मैं,
सवाल,
अहमियत का है नहीं तो ,
वह स्वयं कहता हैं ।
दो जूते मारो
अकल ठिकाने आ जाएगी। मेरी महत्ता तभी लोगों,
की समझ में आएगी।।
शंकर गोयल
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Monday, September 30, 2019
छत्तीसगढ़ से कवि शंकर गोयल की रचना- जूते की महिमा
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