नाम श्रीमती बरखा भाटिया
कोण्डागाँव छत्तीसगढ़
शीर्षक, -हिंदी
हर मज़हब को ख़ुद में समेटे, मेरा हिंदुस्तान
नही है मज़हब इसका कोई, ये है शिशु समान
भारत माँ को सभी हैं प्यारे, मद्रासी या सिंधी
मलयालम है पायल इसकी, माथे की बिंदिया हिंदी
सदियों से बहती आई है, हिंदी की पावन धारा
हर बोली -भाषा को इसकी गोद में मिला सहारा
लिपि नागरी, खड़ी बोली हैं, इसकी माता बहनें
हिंदी है भारत की धड़कन, हिंदी के क्या कहने
हिंदी का है ओज निराला, जन -जन की है भाषा
पूरे करती अनपढ़ साक्षर, सबके मन की आशा
मधुर हवाएँ हिंदी की चलती हैं चारो ओर
हिंदी की है महिमा न्यारी, खूब मच रहा शोर
बनी बोलियाँ सखियाँ इसकी, हिंदी बनी दुल्हनिया
हिंदी की जय बोलेगी, जल्दी ही सारी दुनिया
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