Saturday, September 14, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि कन्हैया साहू 'अमित' की प्रकाशित कृति- हिंदी दिवस

कवि-कन्हैया साहू 'अमित'
विधा-कुण्डलियाँ छंद/हिंदी दिवस
राज्य-भाटापारा (छत्तीसगढ़)
संपर्क-9200252055

*समता समुचित सादगी, समचर सद् समवेत।*
*समीकरण सम्मति सहित, संविधान समुपेत।*
*संविधान समुपेत, समाहित सबकी आशा।*
*संरक्षक संस्कार, सभोचित हिंदी भाषा।*
*कहे अमित कविराज, सबल है इसकी क्षमता।*
*मनोनीत यह भाष, समर्पित समुदित समता।*

*हिंदी हिन्दुस्तान की, हृदय समाहित प्राण।*
*विश्व हितैषी भाष यह, हितकर सबकी त्राण।*
*हितकर सबकी त्राण, नागरी लिपि हिय भाती।*
*हमाहमी  से  दूर, भाव  सम  वक्ष बहाती।*
*कहे अमित कविराज, भारती की यह बिन्दी।*
*हर्षित हिंद विशेष, हितावह हीरक हिंदी।*

*भाषा भारत वर्ष की, हिंदी इसकी भाष।*
*मेल कराती एक यह,भारतीय अहसास।*
*भारतीय अहसास, हृदय को सबकी भाती।*
*कहनी सुननी बात, सार झट यह समझाती।*
*कहे अमित कविराज, पूर्ण करती अभिलाषा।*
*संप्रेषण साकार, देशहित हिंदी भाषा।*

2 comments:

  1. यादव जी आत्मीय आभार रचना प्रकाशनार्थ।

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  2. इत्मीय आभार यादव जी रचना प्रकाशनार्थ।

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