कवि-अनिलशुक्ल
शीर्षक-वसुदेकुटुंम्बकम
स्थान- बस्तर जगदलपुर छत्तीसगढ़
सम्पर्क- 7828501850
सारा जगत
हमारा परिवार है
यही भारतीयता के जीवन का आधार है।
न तू न तेरा न मेरा जिंदगी का
हो सबके लिये बसेरा।
खुद जीयें सबको जीना सिखाये।
चलो हम अपनी खुशियां सबको बाट आयें।
सभी स्वस्थ हो सभी हो निरोग।
सब की जयजयकार हो सब
मिल करें वैष्विक धरा का
उपभोग।
सबकी प्रगति सबकी उन्नति
सब पढ़ें सब आगे बड़ें ।
सबकी हो मंगलकामना सब मे सब के लिये शुभकामना
सबके लिये हो शुभभावना।
सब मिल कर मनायें सारे त्योहार।
सब के लिये मन मे हो प्यार
सबका आदर सबका सत्कार
यही है भारतीयता का वसुदेव
कुटुम्म्बकम का आधार
कह अनिलशुक्ल यही है
हमारे जीवन का सार सारा
जगत है हमारा परिवार।
🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹
कवि अनिलशुक्ल
Tuesday, September 3, 2019
बस्तर जगदलपुर छत्तीसगढ़ से कवि अनिलशुक्ल की रचना- वसुदेकुटुंम्बकम
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