कवियत्री-अनिता सुभाष देशमुख
शीर्षक-कर्बला की याद।
संपर्क- 7697492538
राज्य-छत्तीसगढ़
हुसैन की पैदाइश है
प्रशिद्ध पाक मदीना,
अब्बू अली इब्न थे,
अम्मी थी फातिमा।
दो भाई थे हुसैन और हसन,
मोहम्मद पैगम्बर के थे जो अनमोल रतन।
बड़े होने के नाते हसन को था बनना खलीफा,
करके छल हसन को कर दिया दुनिया से विदा।
खलीफा की हुकूमत हो गया यजीद के सर,
खुद को समझता था जो अल्लाह से बढ़कर।
था जालिम यजीद को
खुद पर बहुत गुरुर
हुसैन को आधीन करने,
किया बहुत मजबूर।
था हुसैन भी खुदा का नेक बन्दा,
न होने दिया इस्लाम को कभी गंदा।
पूरे परिवार के साथ उसने मदीना छोड़ दिया,
यजीद के नापाक इरादें को पल भर में तोड़ दिया।
हुसैन को हराने जब कर्बला का जंग हुआ,
72 लोगो की ताकत हुसैन के संग हुआ।
हजारों सेना लेकर टूट पड़ा यजीद जालिम,
जिससे लड़ने 6 माह के बच्चों को लेकर हुई थी महिलाये शामिल।
जानते थे इतनी सेना के सामने हारना तय था,
फिर भी डंटे रहे न उन्हें मौत का भय था।
बच्चों ने प्यास में मांगे थे जब नीर,
क्रूर यजीद ने बरसवाये थे उन पर तीर।
तारीख थी दस माह था सितम्बर,
जिसमे शहीद हुए हुसैन के साथ साथी बहत्तर।
मुहर्रम के महीना से शुरू होता इस्लामिक नया साल है,
हुसैन की शहीदी इसका मिशाल है।
इस दिन उनकी याद में,
लोग दुख मनाते है,
कर उनके बलिदानी को याद,
इबादत को सर झुकाते है।
स्वरचित
अनिता सुभाष देशमुख
चंदना,राजिम छत्तीसगढ़
No comments:
Post a Comment