कवि श्री स्वपन बोस
शिर्षक अंतिम यात्रा
मोबाइल ९३४०४३३४८१
पता जुगानी कैंप छत्तीसगढ़
कविता अंतिम यात्रा
जब मैं मर गया कुछ लोग
रो रहे थे ।
मैं सो रहा था , चैन की नींद लेकिन लोग मेरे कर्मो
का हिसाब कर रहे थे ।।
जो लोग दिल से प्यार नहीं
करतें थे ,वे लोग आज झुठी आंसू बहा रहे थे ।।
आज मेरे घर में बड़ा उत्सव है , लोग कफ़न लेकर आ रहे थे ।।
कुछ लोग अंतिम यात्रा की
सामान सजा रहे थे ।।
हैरान था मैं यह देखकर की ,जीस शरीर को अपना
समझता था , लोग उसे आग में जला रहे थे ।।
जीवन भर जीसे अपना समझा था ,वे सब मुझे श्मसान में छोड़कर जा रहे थे ।।
मुझे जलाते हुए कुछ लोग
कह रहे थे,कब तक जलेगा
या और समय लगेगा ।।
जीवन भर मैं जो कमाया
सब तो थी झुठी माया
आज यहां बात समझ आ
रहा था ।।
जब जीवन था मेरे पास कभी , जीवन को समझ
न पाया था ।।
झुठी अंहकार को लेकर
संसार में विचरण करता था।।
मेरी अंतिम यात्रा सफल हो
गई , मीला था जो अनमोल
जीवन ,जी न सका यूं ही
व्यर्थ खो गई ।।
बहुत बहुत बधाई हो भईया जी
ReplyDelete