Wednesday, September 4, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि दिनेश कुमार विश्वकर्मा की रचना- नारी

कवि : दिनेश कुमार विश्वकर्मा
शीर्षक: नारी
राज्य: छत्तीसगढ़
सम्पर्क: 8463852536

***************************
                          नारी
बेटी का ब्याह
ग़रीब पिता के लिए
होता है जीवन भर का स्वप्न
देखा...कई बार इसके लिए
खेत बिकते, खलिहान बिकते
देखा...कई बार
ख़ुद के अरमान बिकते

क्योंकि ...पुत्री के रूप में
जन्म लेती है लक्ष्मी
कुंती का रहस्य, द्रोपदी का प्रतिशोध
सीता की पवित्रता, सती का हठ
शबरी की प्रतीक्षा, मीरा का समर्पण
जिनकी साधना में देखा...
कई बार भगवान बिकते...
देखा... कई बार
ख़ुद के अरमान बिकते

बेटियाँ जैसे साँस की डोर
जीवन के तम में, आशा की भोर
रसोई की रौनक, हँसता आँगन
कुटुम्ब की अस्मिता
इसलिए तो बिदाई में
अनंत अश्रुओं के बूँद से भी ऋण
चुकाया नहीं जाता...
जाने क्यूँ, इस युग में सहज है
पर देखा नहीं जाता
'आधुनिकता'के नाम पर
'नारी' का सम्मान बिकते

देखा... कई बार
खेत बिकते, खलिहान बिकते
कई बार खुद के अरमान बिकते...

***************************
दिनेश कुमार विश्वकर्मा
कोण्डागाँव (छत्तीसगढ़)

3 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर

    ReplyDelete
  2. THE GROUND REALITY HAS BEEN HIGHLIGHTED.. A TRUE REFlECTION OF INDIAN NOBLE WOMEN their story, sacrifice and power
    And finally the heart touching Indian culture of marriage ..
    The complete POEM

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...