Friday, September 20, 2019

छत्तीसगढ़ से कवि दिवाकर चंद्र त्रिपाठी की रचना- अपने दिल से....

कवि--दिवाकर चंद्र त्रिपाठी
शीर्षक--अपने दिल से
राज्य --- छत्तीसगढ़

ग़ज़ल
काफ़िया--तुकान्त__अम रफ़ीद----( पदान्त ) इच्छानुसार

दिनांक_२०/९/२०१९ ,     #अपने_दिल_से ।
          *********

   दिल से पूंछ के देखो एक बार सनम
     क्या मेरी चाहत पहले से है कम ।।

इस तरह बैठे  हो, अफसुर्दा होकर ,
तेरे अबसार इस क़दर क्यों हैं नम  ।।

तेरे चेहरे का नूर आब-ए-आईना थी कभी,
थम नहीं रहे आब-ए-चश्म जुदाई का है गम ।।

किसी को अपना बना लेना तुम्हारी खूबी है ,
मुझे पता है तेरी शख्सियत में है वो दम  ।।

तेरे आग़ोश में है #दिवाकर कोई ख़ाब नहीं ,
ये तेरे रुख़सार की लाली है क्यों मद्धम  ।।

आज की रात हर ख़्वाहिश पूरी कर दूं  ,
वश्ल की रात है ये वक्त है क्यों बेरहम  ।।

इन विखरी ज़ुल्फ़  साये में मुझे छुप जाने दो  ,
मेरे पहलू में हो फ़िरभी तन्हाई का है  आलम  ।।

#दिवाकर_चंद्र_त्रिपाठी ।

 

 

#डीसी_त्रिपाठी ( #रचनाकार  )

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