कवि--दिवाकर चंद्र त्रिपाठी
शीर्षक--अपने दिल से
राज्य --- छत्तीसगढ़
ग़ज़ल
काफ़िया--तुकान्त__अम रफ़ीद----( पदान्त ) इच्छानुसार
दिनांक_२०/९/२०१९ , #अपने_दिल_से ।
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दिल से पूंछ के देखो एक बार सनम
क्या मेरी चाहत पहले से है कम ।।
इस तरह बैठे हो, अफसुर्दा होकर ,
तेरे अबसार इस क़दर क्यों हैं नम ।।
तेरे चेहरे का नूर आब-ए-आईना थी कभी,
थम नहीं रहे आब-ए-चश्म जुदाई का है गम ।।
किसी को अपना बना लेना तुम्हारी खूबी है ,
मुझे पता है तेरी शख्सियत में है वो दम ।।
तेरे आग़ोश में है #दिवाकर कोई ख़ाब नहीं ,
ये तेरे रुख़सार की लाली है क्यों मद्धम ।।
आज की रात हर ख़्वाहिश पूरी कर दूं ,
वश्ल की रात है ये वक्त है क्यों बेरहम ।।
इन विखरी ज़ुल्फ़ साये में मुझे छुप जाने दो ,
मेरे पहलू में हो फ़िरभी तन्हाई का है आलम ।।
#दिवाकर_चंद्र_त्रिपाठी ।
#डीसी_त्रिपाठी ( #रचनाकार )
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