कवि-राजकिशोर धिरही
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-जुर्माना
सम्पर्क-9827893645
पड़ोसी मित्र
शहर जाने की बात
बता रहे थे
मगर कुछ ही घण्टे में
वे लौट कर आ रहे
समझ नहीं आया
जब माजरा
हमने कहा-
मित्र बताओ जरा?
खरीददारी कर के
इतनी जल्दी
कैसे आए?
क्या ऑनलाइन
सामान थे
बुक कराए
मित्र के मुख से
नहीं निकल रहा था
बोल
जैसे किसी ने
बजा दिया हो उसका
ढ़ोल
हमने प्रश्नों को
फिर से
जब दोहराया
तो,पड़ोसी मित्र
असल बात
हमें बताया-
पैसे लेकर
जा रहा था
बाजार
पर चौक में
रोक लिए सिपाही
इस बार
रोकने वालों ने
बिना हेलमेट हो
कह कर चमकाया
नया नियम
पढ़ पढ़ कर
समझाया
सामान क्या लाता
आँसू बहा रहा हूँ
जेब का सारा पैसा
जुर्माना भर के
आ रहा हूँ..
राजकिशोर धिरही
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