Thursday, September 12, 2019

जगदलपुर ,छतीसगढ़ से कवि अनिलशुक्ल की प्रकाशित कविता- हिन्दी हिंदुस्तान की

हिन्दी दिवस पर
कवि-अनिलशुक्ल
शीर्षक- हिन्दी हिंदुस्तान की
सम्पर्क-7828581850
स्थान-जगदलपुर ,छतीसगढ़

हिंदी हिंदुस्तान की, तेरी मेरी भाषा ये तो भाषा आम इन्सान की।
कोकिल अमराइयों में गूंजे राधा कृष्ण की प्रेम भगवान की।

कबीर तुलसी मीरा सूरदास
रसखान की
हिन्दी हिंदुस्तान की
गंगोजमुनी की धारा से उपजी
लोकभाषा बनकर गई पूजी
ये तो रमती भजनों में अजान
की

हिन्दी हिंदुस्तान की
घर घर मे बोली जाती सबके मन को ये सुहाती
हिन्दी के बोलने से गर्व से फूल जाती छा ती ।
ये तो भाषा हम सबकी संम्मान की

हिन्दी हिंदुस्तान की
सदैव फले फूले, मानव के
सांसों में सरगम बन झूले
ये तो देशराग देशभाषा जन
कल्याण की।

हिन्दी हिंदुस्तान की
संस्कृत इसकी माता है, देवनागरी से इसका नाता है
बावन स्वर व्यंजनों से भाषा
बन मदमाता है
ये तो पहरेदार धर्म और ईमान
की।

हिन्दी हिंदुस्तान की।
इसकी किसी नही  है बैर सबकी
मनाये ये खैर
अग्रेंजी उर्दू इसकी बहना इसके साम्यता का क्या कहना।
ये तो राष्ट्र के राष्ट्रभाषा का
गहना।
युगों युगों से चलती हिन्दी
भाषा सीना तान की
हिन्दी हिंदुस्तान की।
कह अनिलशुक्ल ये हमारी
भाषा राष्ट्र की आशा
जन जन जीवन की प्रत्याशा
ये हमारे आन बान शान की
हिन्दी हिंदुस्तान की
कवि-अनिलशुक्ल

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