Tuesday, September 24, 2019

बिहार से इन्दु कुमारी की कविता- इश़्क

कवियत्री - इन्दु कुमारी
राज्य - मधुबनी बिहार
बिषय - इश्क़

               इश्क़

इश्क़ में ना जाने क्या बात है
       सारी दुनिया भुलवा देती है
इश्क़ में ना जाने क्या गुरूर है
       इंसान को खुदा बना देती है

इश्क़ में ना जाने कैसी नजाकत है
      इसके सामने कुछ भी नजर  
       नहीं   आता है

इश्क़ का ना जाने क्या दस्तूर है
           खुद को ही भुलवा देता है

इसके नशे में एक अलग ही
       दुनिया का अहसास है
हर सांसो में घुली उनकी सांस है

जिसको लग जाती है लत इसकी
       जागता है रातों को फिर  कहां ‌वो सोता है

बस मिलने की उम्मीद में ही वो
          इंतजार करता है
इंतजार खत्म हो जाए,
          ये फरियाद करता है।

💎🌸💎🌸💎🌸💎

              कवियत्री - इन्दु कुमारी
               मधुबनी बिहार

14 comments:

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति।ला लाज

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति। लाजवाब

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  3. बहुत ही सुन्दर।अप्रतिम।स्वच्छ,निर्मल बिल्कुल आपकी तरह।

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  4. प्यार हि एक ऐसा दौलत हैं।
    जो दुश्मन को खरीद सकता है।।

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