कवियत्री - इन्दु कुमारी
राज्य - मधुबनी बिहार
बिषय - इश्क़
इश्क़
इश्क़ में ना जाने क्या बात है
सारी दुनिया भुलवा देती है
इश्क़ में ना जाने क्या गुरूर है
इंसान को खुदा बना देती है
इश्क़ में ना जाने कैसी नजाकत है
इसके सामने कुछ भी नजर
नहीं आता है
इश्क़ का ना जाने क्या दस्तूर है
खुद को ही भुलवा देता है
इसके नशे में एक अलग ही
दुनिया का अहसास है
हर सांसो में घुली उनकी सांस है
जिसको लग जाती है लत इसकी
जागता है रातों को फिर कहां वो सोता है
बस मिलने की उम्मीद में ही वो
इंतजार करता है
इंतजार खत्म हो जाए,
ये फरियाद करता है।
💎🌸💎🌸💎🌸💎
कवियत्री - इन्दु कुमारी
मधुबनी बिहार
बहुत सुंदर प्रस्तुति।ला लाज
ReplyDeleteबहुत सुंदर प्रस्तुति। लाजवाब
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर।अप्रतिम।स्वच्छ,निर्मल बिल्कुल आपकी तरह।
ReplyDeleteSo good
ReplyDeleteBahut he sundar rachana
ReplyDeleteWonderful kavita 👍👍
ReplyDeleteप्यार हि एक ऐसा दौलत हैं।
ReplyDeleteजो दुश्मन को खरीद सकता है।।
Nice, keep it up.
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteNice,
ReplyDeleteलाजवाब
ReplyDeleteBhaut sundar
ReplyDeleteSunder
ReplyDeleteVery super sayari
ReplyDelete