नाम ~ सीमा गर्ग मंजरी
शीर्षक ~ चिरैया की पीर
राज्य ~ उत्तर प्रदेश
सम्पर्क सूत्र ~
शीर्षक ~ चिरैया की पीर
राज्य ~ उत्तर प्रदेश
सम्पर्क सूत्र ~
चिरैया की पीर ~
व्याकुल हुई अधीर
गोरैया कहाँ मिलेगा नीर
प्यासे प्राण विकल हुये हैं
रहा न मन में धीर
रे मानव भरो सकोरा नीर ..
गोरैया कहाँ मिलेगा नीर
प्यासे प्राण विकल हुये हैं
रहा न मन में धीर
रे मानव भरो सकोरा नीर ..
प्राण बेसुध से हो रहे हैं
तपती धरा होश खो रहे हैं
पक्षी प्रजाति के हाल बुरे हैं
नीड़ को तरसे बेहाल पड़े हैं
अँसुवन बहाये नीर..
रे मानव भरो सकोरा नीर..
तपती धरा होश खो रहे हैं
पक्षी प्रजाति के हाल बुरे हैं
नीड़ को तरसे बेहाल पड़े हैं
अँसुवन बहाये नीर..
रे मानव भरो सकोरा नीर..
तप्त सूर्य तड़क रही भूमि
चहुँओर बस बंजर सा मंजर
काटे क्यों दरख्त जहाँ था ठिकाना
बरगद, पीपल, गूलर का जमाना
मिला न कहीं अब ठौर ठिकाना
गोरैया,पक्षियों की सुनो रे पीर..
रे मानव भरो सकोरा नीर..
चहुँओर बस बंजर सा मंजर
काटे क्यों दरख्त जहाँ था ठिकाना
बरगद, पीपल, गूलर का जमाना
मिला न कहीं अब ठौर ठिकाना
गोरैया,पक्षियों की सुनो रे पीर..
रे मानव भरो सकोरा नीर..
कैसे कहाँ अब होगा बसेरा
बाग, बगीचे, फलदार पेडों का घेरा
कहाँ होगा अब घौंसले का बाना
जहाँ मिलेगा अन्न ,पानी ,दाना
लुप्त हो रहे धरा से कीर
रे मानव भरो सकोरा नीर...
बाग, बगीचे, फलदार पेडों का घेरा
कहाँ होगा अब घौंसले का बाना
जहाँ मिलेगा अन्न ,पानी ,दाना
लुप्त हो रहे धरा से कीर
रे मानव भरो सकोरा नीर...
इक ठौर जो मिलेगा हमको
देंगे दुआयें हम पक्षी तुमको
बसे रहेंगे सदा तुम्हरे बसेरे
पेड़ लगाओ तुम सदा घनेरे
कोटर में सुरक्षित रहेंगे शरीर
रे मानव भरो सकोरा नीर..
देंगे दुआयें हम पक्षी तुमको
बसे रहेंगे सदा तुम्हरे बसेरे
पेड़ लगाओ तुम सदा घनेरे
कोटर में सुरक्षित रहेंगे शरीर
रे मानव भरो सकोरा नीर..
✍ सीमा गर्ग मंजरी
मेरी स्वरचित रचना ©
मेरठ
मेरी स्वरचित रचना ©
मेरठ
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