Wednesday, September 11, 2019

पटेवा महासमुन्द(छत्तीसगढ़) से कवि मनोज यादव "भावरिया" की कविता- विघन हरैइया ग

नाम-मनोज यादव "भावरिया"
शीर्षक-विघन हरैइया ग
राज्य-पटेवा महासमुन्द(छत्तीसगढ़)
संपर्क:-8234057386

विघन हरैइया
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गौउरी के ललना,
सोना के पालना।
भोले बाबा के आंगन ग,
तैहा विघन हरैइया ग,सब ल पार करैइया ग।

(1)
मईया तोर पारबती हे
ददा भोला भंडारी....$$$$2
रिधि सिधि तोर घरवाली
मुसवा बने सवारी...$$$$$2
चौदह लोक म तोला पूजत हे
तीनो भुवन म साजे ग
तैहा विघन हरैइया ग,सब ल पार करैइया ग

(2)
गांव-गली म तैहा बिराजे
धर के कई अवतारी....$$$$$2
तोर चरन म माथ नवांवे
दुनिया के नर-नारी....$$$$$2
पहली पूजा तोर होवत हे
भादो शुक्ल के पछ म ग
तैहा विघन हरैइया ग,सब ल पार करैइया ग

(3)
अंधरा ल आँखी अउ कोढ़हीन ल काया
बिन मया ल महतारी....$$$$2
ठगरी ल लइका अउ निरधन ल माया
अब्बड़ तोर कलाकारी....$$$$2
लाडू पेड़ा के भोग लगावत हे
संझा बिहना तोर ठउर म ग
तैहा विघन हरैइया ग,सब ल पार करैइया ग

रचनाकार:-
मनोज यादव "भावरिया"
भावा (महासमुन्द)

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