Saturday, August 31, 2019

छिन्दवाड़ा(म.प्र.) से कवि धनंजय सिते(राही) की कृति जंग

*कवि-धनंजय सिते(राही)*
*जिला-छिन्दवाड़ा(म.प्र.)*
*सम्पर्क-9893415829*
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               *जंग*
              '''''''''''''''''''''''''
कदम कदम खडे है दुश्मन
परछाई सा मुखबिर है संग!
सजग सदाही रहना मित्रो
है जिंदगी सबसे बडी जंग!!
                  २
तानो के शस्र बडे बडे है
कुटनिती के बम गोले है!
इन सब के आगे हम सब
एकदम सिधे साधे भोले है!!
                   ३
तरक्की करता कोई दिखे
शड़यंत्र बनाते गिराने का!
इस उसके झाँके वो घरमे
जले घर ना दिखे खूदका!!
                  ४
जंग होती है देश देश मे
लड़ते सुना है हमने देश!
जिवन मे अपनो मे झगडे
अपने अपनो मे है द्वेश!!
                 ५
ईमान सादगी ममता माया
ईश्वर भक्ती हथियार है संग!
जितने भी दुश्मन जिवन मे
जित जाओगे जिवन *जंग*!!
               ''''''''''''''''''''''''''
*कवि-धनंजय सिते(राही)*

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