आंख जब खुलता है सुबह,
बस तुझे देखने का तलब रहता है,
आएगी तू लौटकर एकदिन जरूर,
ये मेरा दिल मुझसे कहता है।
तेरी वो मुस्कान की झलक को देखकर
मैं रोज जागता हूँ, और हूँ सोता ,
हां ये वही इंतज़ार है,
जो कभी खत्म नही होता।
मुझे याद है वो पल,
जब तुम्हे पहली बार था देखा,
दिल के एहसास को शब्दों में बयां करता था बैठा।
कभी होता खुश तो,
तेरी मुस्कान को महसूस करता अपने अंदर,
और कभी करता किसी मोड़,
पर हार का सामना,
तो तेरी तस्वीर जो दिल मे कैद है,
उसे याद कर मैं बहुत रोता,
हां ये वही इंतज़ार है,
जो कभी खत्म नही होता।
तुझे न पाने का गम तो है दिल मे जरूर,
पर तेरी जगह ले पाने को न कर
पायेगा मुझे कोई मजबूर।
तेरी यादों की खुशबू को आज भी,
अपने कामो में भी हरपल मैं हूँ सँजोता,
हाँ ये वही इंतज़ार है,
जो कभी खत्म नही होता।
©®✍अनिता सुभाष देशमुख
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