Sunday, July 7, 2019

हास्य रचना by कवि. कमलेश कौशिक

वाह रे.आजकल के लभ।
चल गे त ठीक नही तुरते अलग।।
एक झन कइ.झन ला मेनटेन्स करत हे।
समय देख के.सब ला सेनटेन्स करत हे।।
एक मोबाइल में चर चर रिचार्ज।
खरचा करेश त ठीक नही ते तुरते डिस्चार्ज।।

कुद कुद के तिहार मनात हे।
कभु टेडी डे कभु प्रॉमिस डे।।
कभु वेलेंटाइन डे मनात हे।
टुरा ह टुरी के चक्कर में।।
कोठी के धान ल उरकात हे।
सज संवर के जात हे करके मेकप।।
चार दिन के चांदनी.तहान होगे ब्रेकअप।
बिहान दिन फेर उही बुता।
अब दुसर ल फंसात हे।।

घर में काम धाम परे हे।
टुरा सेखी में बोहात हे।।
घर में आडी़ के काडी़ नी करे।
टुरी ल शॉपिंग करात हे।।
में केहेव..
              अभी समय हे पढें के।
              नवा रस्ता गढे़ के।।
ये फोकट समय ल पहात  हे।
चन्नी में दुध दुहीबे त काला पाबे।।
अउ बाद में करम ल दोस लगात हे।
अभी नइ सुधरबे त सुधरबे कब...

वाह रे.आजकल के लभ।
चल गे त ठीक नही ते तुरते अलग।।

    रचनाकार✍
कवि. कमलेश कौशिक
   😂कठलहा😂

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