Monday, June 3, 2019

"माँ"- written by कवि श्री भूपेंद्र कुमार

माँ तुमने मुझे कितनी तकलीफो से पाया है,
माँ तुमने मुझे कितनी तकलीफो से पाला है।

माँ तुमने मुझे पाने के लिए हर मंदिर,हर देवालय पर मंथा टेका है,
माँ तुमने मुझे नौ महीने अपने कोख में रख कर कितना दर्द सहा होगा,
माँ तेरे दर्द को बयां कर पाना मुश्किल है।

माँ मैं तेरे आँचल में पला-बढ़ा हूँ,
माँ मैं तेरी ऊगली पकड़ कर चलना सीखा हूँ,
माँ मैंने प्यार तुम्ही से करना सीखा है।
माँ मैंने तेरे आँचल में सारी खुशियां देखी है

माँ तेरे दूध का हर बूँद मेरी रंगों में समाया है,
माँ मेरी खुशी के लिए पूरी दुनिया से लड़ जाती है।

बिना बोले मेरे बातो को समझ जाती है,माँ
मेरे सारे नखरे झेलती है ,माँ

मेरे नाराज़ होने पर मुझे प्यार से मना लेती है,माँ
मेरे नाराज़ होने पर मुझे प्यार से मना लेती है,माँ
अपनी ईच्छाओं को त्याग कर मुझे खुशियां देती है,माँ

माँ तुम कभी नही थकती करने मेरा काम
माँ तुम खुशी से कर देती मेरा काम।

माँ तुम ने अपनी भूख-भूला,मेरे भूख की चिंता करती हो
अपने दर्द छुपा कर हमेशा खुश रहते देखा है,
मुझे चोट लगने पर तेरे आँखो में आंसू भर आते है।

माँ तेरी आँचल में खुद को महफूज पाता हूँ,
माँ तेरी दुवाएं हमेशा मेरे साथ रहती है।

माँ मैने भगवान से कुछ मांगते देखा है,
माँ मैने हमेशा मेरे लिए कुछ मांगते देखा है।
माँ मैने भगवान तो नही देखा है,
पर तुम में मैने भगवान को देखा है।

माँ तुम मुझे हमेशा याद आती हो,
माँ तुझ से ज्यादा मुझे कोई नही कर सकता इतना प्यार,
माँ तेरे प्यार से बढ़ कर इस दुनिया मे कुछ नही है,
माँ तेरे बिना यह जिंदगी अधूरी है,
माँ मैं तेरा यह कर्ज कभी चुका नही पाऊँगा।

✍🏻रचना कार...✍🏻
     भूपेंद्र कुमार
    छुरा,गरियाबंद
मो.-9630705704

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...