(छप्पय छंद)
सौंहत के भगवान , ददा दाई ला जानौ।
सेवौ साँझ बिहान , बात अउ उनखर मानौ।
देथे जीवन दान , पियाके दूध ल दाई।
पालन करके बाप , हरे जम्मों करलाई।
मिलथे मनवा मान ले , सेवा के परिणाम हा।
मातु पिता आशीष ले , बनथे बिगड़े काम हा।।
छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम- बोडराबांधा (राजिम)
जिला - गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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