बेटी दिवस पर देश की सभी बेटीयों को समर्पित-
घर की किलकारी होती है बेटियां,
आंगन की फुलवारी होती है बेटियां।
माँ की सखी होती है बेटियाँ,
भाई की कलाई की राखी होती है बेटियाँ।
फिजाओ की बहार होती है बेटियां,
बारिश की फुहार होती है बेटियां
गीत की गुनगुनाहट होती है बेटियां,
होंठो की मुस्कुराहट होती है बेटियां।
कई रिश्तों की सार होती है बेटियां,
रोशन गुलजार होती है बेटियां।
माँ सरस्वती की संगीत होती है बेटियाँ
एक सच्ची निष्कपट मीत होती है बेटियाँ।
क्या लिखूं बेटी के लिए आज,
हर शब्द फीकी पड़ती है,
न जाने कितने तकलीफों से ये बेटियाँ गुजरती है।
माँ दुर्गा है कभी शांत सी,
कभी रौद्र माँ काली होती है बेटियाँ।
परिवार की फुलवारी को सींचने वाली ,माली होती है बेटीयाँ।
कभी बन सीता अग्नि से गुजरती है बेटियाँ,
कभी बन राधा प्रेम में बिछुड़ती है बेटियाँ।
कभी बन के लक्ष्मी बाई लड़ती है बेटियाँ,
सभी के आंचल को खुशीयों से भरती है बेटीयाँ।
आंखों की चमक, निर्मल प्रेम स्वरूप होती है बेटियाँ,
....✍️अनिता सुभाष देशमुख "सहजी"
24/01/2019
बहुत सुंदर
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