बेटी पहुना बन जथे , जब बिहाव हा होय।
मन मा नोनी सोच के , कलप कलप के रोय।
कलप कलप के रोय , दुःख के आँसू भारी।
कहे जनम का देय , विधाता अबला नारी।
सुख के दे भंडार , भरौ खुशियाँ ले पेटी।
करौ मान सम्मान , होय जब पहुना बेटी।।
छंदकार :- विरेन्द्र कुमार साहू
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