👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼
हे मेरे ईश्वर ,हे मेरे रब्बा,
आज 'यही दुआ है मेरी,'
भूल जाऊँ इस जग को,
पर नाम न भूलूं मैं तेरी।।
👏🏼फूल मिले या काँटा मिले,
न गम हो मुझको कोई ।
तुझको मैं कभी भूल जाऊँ,
न हो कभी ऐसा पल कोई।।
क्या देता है?क्या लेता है?
ये है बस मर्जी तेरी,,,
👏🏼सुख मिले या दुख मिले,
प्रभु मुझको कोई गम नहीं।
मुझको इतना लायक समझा,
यह तेरी कृपा से कम नहीं।।
मेरे कारण यहाँ कोई रोए,
ना हो ऐसा कोई करम मेरी,,
👏🏼दुःख देना मुझे जितनी चाहो,
दुःख ही सुख का खान है।
कौन है अपना, कौन पराया?
दुःख में होता पहचान है।।
बाँट सकूँ मैं सबके दुःख को,
जनम सफल हो जाए मेरी,,
👏🏼जिसने मुझको दर्द दिया है,
उसको भी तुम खुश रखना।
जिसने मुझको खुशी दिया है,
तू उसको गम से दूर रखना।।
यही दुआ है मेरी रब्बा,
जग में सब का कल्याण हो ।
कर्म सभी का पावन कर दो,
हर मनुज यहाँ भगवान हो।।
रचना✒✒श्रवण कुमार साहू"प्रखर",
राजिम, गरियाबंद
No comments:
Post a Comment