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🎈🎈🎈🙏🎈🎈🎈
दईया दईया दईया रे.......-2
डगमग डगमग डोल रही हैं
देश की नईया रे
दईया दईया दईया रे-......2
अरे जाने कैसे पार लगेगी
देश की नईया रे *दईया ........................*
🎈🎈🎈 *(1)* 🎈🎈🎈
हर तरफ जुल्म बेबसी छाई हुई है
कोई रोक पाता नहीं हैं
जाने कैसा व्याधि छाया है वतन पे
कोई बच पाता नहीं है
*तु ही अब तो पार लगादे*
*राम रमईया रे.......*
दईया दईया दईया रे..........
🌹🌹🌹(2)🌹🌹🌹
सहा नहीं जाता है पापों का बोझा
धरा अब रो रही है
गौ माता की रक्षा कौन करें
दिन-रात कतल हो रही है
*तू ही गईया माँ को बचा दे*
*किशन कन्हैया रे..*
दईया दईया दईया रे...........
🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷
📝रचनाकार📝
*विरेन्द्र सिंह ठाकुर*
कवि,व्याख्याकार एवं उद्घोषक
ग्राम-कपसीडीह (टेका)
मो.नं.-8718916468
Thursday, June 27, 2019
दईया दईया दईया रे- by विरेन्द्र सिंह ठाकुर
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