Thursday, June 27, 2019

दईया दईया दईया रे- by विरेन्द्र सिंह ठाकुर

*
   🎈🎈🎈🙏🎈🎈🎈
दईया दईया दईया रे.......-2
डगमग डगमग डोल रही हैं
                   देश की नईया रे
दईया दईया दईया रे-......2
अरे जाने कैसे पार लगेगी
                   देश की नईया रे *दईया ........................*
🎈🎈🎈 *(1)* 🎈🎈🎈
हर तरफ जुल्म बेबसी छाई हुई है
        कोई रोक पाता नहीं हैं
जाने कैसा व्याधि छाया है वतन पे
          कोई बच पाता नहीं है
*तु ही अब तो पार लगादे*
         *राम रमईया रे.......*
दईया दईया दईया रे..........
🌹🌹🌹(2)🌹🌹🌹
सहा नहीं जाता है पापों का बोझा
            धरा अब रो रही है
गौ माता की रक्षा कौन करें
      दिन-रात कतल हो रही है
*तू ही गईया माँ को बचा दे*
            *किशन कन्हैया रे..*
दईया दईया दईया रे...........
🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷
            📝रचनाकार📝
         *विरेन्द्र सिंह ठाकुर*
  कवि,व्याख्याकार एवं उद्घोषक
    ग्राम-कपसीडीह (टेका)
    मो.नं.-8718916468

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