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तंय बुले ल आबे मोर गांव,
अब्बड़ दूरिया, कटकट ले जंगल,
डोंगरी बीच म बसे, हे मोर गांव ,
तंय बुले ल आबे मोर गांव-----
बर-पीपर, साल, सगौवना, सरई,
तेंदूपाना,महुआ के छांव ले,
दुपहरिया म कूप अंधियार,
रद्दा छिका जथे रूख के छांव ले,
बघवा, तेंदुआ, भलुवा के, जंगल म होथे राज रे,
रेंगत रद्दा म भेंट परगे त,हो जाही जी के काल रे.
तंय बुले ल आबे मोर गांव......
माटी के घर-दुवार, खपरा,
घास फूस के हावय छानी रे,
असाढ़-सावन भादों म आबे,
पाबे नरवा-नदिया म उफनत पूरा रे,
गरजत रद-रद गिरत पानी म,
रेंगत सांप बिच्छू,रंग रंग के कीरामकोरा रे,
बरसत पानी म आबे त खवाहंव,
माटा चटनी, पान रोटी रे.
तंय बुले ल आबे मोर गांव......
रथिया म कूप अंधियार,
चंदा अंजोर बने हे हमर संगवारी रे,
रिंग-झिंग झिगुर के बोली ले,
रथिया जंगल हो जथे टोनही रे,
घर-कुरिया भीतरी नानकुन लइका,
पोटारे हो जथे बिहिनिया रे,
हमर पुरखौती चिन्हार इही,
बन, रूख-राई जंगली जानवर रे.
तंय बुले ल आबे मोर गांव........
तीर कमान हमर अंगरखा,
करथन हमन जंगली सूरा के सिकार रे,
बन उपज रूख-राई,महुंआ, तेंदू ,चार ,
इही ले होथे हमर गुजारा रे,
छीन बांस के टुकनी सूपा ले,
कहावत कला बेम्बू रे,
दाई ददा ले सिखत गुन ल,
आबे तंहु ल सिखोहुं रे.
तयं बुले ल आबे मोर गांव.......
कुरिया हमर लाल बंगला,
पुरखा के हवय चिन्हार रे,
भीतरी ते खुसर नई सकबे,
बिहाय नोनी तको रहिथे दूरिहा रे,
देवता धामी जेखर करथन हमन परायन रे,
कमार,भुंजिया हमन छत्तीसगढ़ के रहिवासी रे,
तयं बुले ल आबे मोर गांव.....
जंगल राज म आगे हे
बिकास के नवा दउर रे,
बड़का-बड़का रूख राई कटगे,
बनत हे सुघर रद्दा रे,
नदिया -नरवा तको पटगे,
बनगे हे बांध अउ बंधावा रे,
करिया नागिन कस रद्दा,
पहुंचत हे मोर अँगना दुवारी रे.
तयं बुले ल आबे मोर गांव.......
डोंगरी कुरिया जगमगावत हे,
अंधियारी रथिहा बनगे हे लट्टू संगी रे,
जंगल बिकास म कंडिल नंदागे,
सउर उरजा ले जगमग होवत हे डोंगरी रे,
अंधियारी जिनगी म हमर ,
उवत नवा सुरूज के अंजोर रे,
चंदा अंजोर म तयं आबे,
ढोल -नगाड़ा बजा के संगे नाचबों रे.
तयं बुले ल आबे मोर गांव.....
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कवियतरी
डॉ. जयभारती चन्द्राकर
प्राचार्य
सिविल लाइन गरियाबंद
जिला गरियाबंद (छ. ग.)
मोबाइल न. 9424234098
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