इस धरती से उस गगन तक,
इस पतझड़ से,उस चमन तक,
मुझको लेकर जाना,जीवन साथी,
साथ निभाना,हो जीवन साथी
💞💞💞💞💞💞💞💞
तपती गरमी हो जीवन की,
या कोई अंधेरी रात हो।
शाम गुलाबी रंग बिखेरे,
या सुबह की जज्बात हो।।
सुख -दुःख में, छाँव-धूप में,
गीत प्रेम के गाना,जीवन साथी,
साथ निभाना,हो जीवन साथी
💞💞💞💞💞💞💞
मैंने जीना सीखा जहाँ में,
सब तेरा उपकार है।
मेरा तन -मन ,मेरा जीवन,
तेरे लिए उपहार है।।
तेरा -मेरा साथ न छूटे,
छूटे चाहे जमाना,जीवन साथी,
साथ निभाना,हो जीवन साथी--
💞💞💞💞💞💞💞💞
बदले मौसम, बदले दुनियाँ,
या बदले ये जमाना।
हाथ पकड़ के, साथ यूँ चल के,
संग -संग चलते जाना।।
सात जनम के, सात वचन को,
साथी भूल न जाना ,जीवन साथी,
साथ निभाना, हो जीवन साथी।।
💞💞💞💞💞💞💞💞
रचनाकार
श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
राजिम, गरियाबंद,(छ. ग.)
Saturday, June 1, 2019
साथ निभाना by कवि श्री श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
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