जिंदगी यूं न कट जाए,
हर मुश्किल से लड़ना सीखो।
जीवन में मिलेंगे खाई अनेक,
सम्हलकर चलना सीखो।
चाहे कितनी विषम परिस्थियां ,
ना हों कभी परेशान ।
करले समझौता जो वक्त से,
है वही सच्चा इंसान ।
धीरज पतझड़ के पेड़ों से,
फूलों से मुस्कुराना सीखो।
ना मिले जब तक मंजिल,
चींटी पग बढ़ाना सीखो ।
अग्नि परीक्षा है ये जीवन,
हो स्वच्छ मन का हर कोना।
चमकोगे तुम भी कृष्णा ,
चमकती है जैसे सोना ।
इतना सरल बनाओ मन को,
ना हो तन-मन कमजोर।
निर्मल पानी जैसा हो मन,
तन हो हिमालय सा कठोर।
भुलकर भी खुद को प्यारे ,
मत समझो तुम हीन।
वरना होगी तुम्हारे हाथों,
तुम्हारी ही तौहीन ।
रंगीन दुनिया की चकाचौंध में,
लक्ष्य ना भूल जाना।
छुपा तुझमें अलौकिक शक्ति,
इतना याद रखना ।
प्रशंसा पर ही खुश ना होना,
आलोचना पर भी देना ध्यान।
तब बनोगे विवेकानंद तुम ,
होगा मेरा भारत महान।
✍️कृष्ण कुमार कश्यप
शिक्षक
शा.उ.मा.वि. उरमाल
गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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