5 जुलाई 2018
एक वो युग था ,जिसमे स्त्री सलामत रहती थी ,
हर पुरुषों के ह्रदय में वो एक अमानत रहती थी।
जिसमें लड़कियों को शस्त्र चलाना सिखाया जाता था,
कैसी करनी है खुद की रक्षा ये बतलाया जाता था।
कहा जाता हैयुग के साथ, सोच बदलती है नयी,
आज यहां हैवानियत के सिवा, नही दिखता सम्मान कोई।
सदियों से सुनते आएं हैं,
जहाँ नारी की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं।
किंतु आज के इस दौर में कुछ ही इंसान है ,
बाकि सब शैतान वास करते हैं।
माँ ,बहन की सम्मान की रक्षा की बात ही छोड़ो,
यहां 3 माह की बच्ची भी महफूज नहीं है।
मानवता सारी ध्वस्त हो रही,
ऐसे घिनौने कांड से भी मंदिर -मस्जिद भी बचा नहीं है।
एक समय ऐसा भी आएगा कि,
लड़कियां घर से निकलने से भी डऱ जायेंगी।
किसी भी रिश्ते के प्रति विश्वास भी हमेशा के लिए मर जायेंगी।
हिंदुस्तान के कानून के पन्ने पर ,
न जाने कब इसका समाधान मिलेगा।
करें कलम सरे आम ऐसे दरिंदो का सर ,
न जाने कब ये फरमान निकलेगा।
जब किसी जज या नेता की बेटी के साथ ,ऐसा कोई वाक्या घटेगा,
तब जाकर कानून ऐसे दरिंदो को,
फांसी पर लटकाने को जुटेगा।
जागो ऐ कानून के बन्दे,
आँख की पट्टी खोलकर अब तो नयी इतिहास जड़ो।
अस्मिता लूटा है जिनका,
अब तो उनका इंसाफ करो ...अब तो उनका इन्साफ करो...😥....✍️✍️
.......अनीता सुभाष देशमुख
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