Friday, May 31, 2019

तान फिर सुनादे - by कवयित्री श्रीमती केवरा यदु "मीरा"

वो धुन कहाँ से पाऊँ मुरली बजाने वाले।
हो जाये मनवा पागल वो तान फिर सुनादे।
वो धुन कहाँ से पाऊँ--

मै बावरी सी ड़ोलूं  बैठूं कदंब  की छैंया।
रो रो तुझे  पुकारूँ कब आओगे कन्हैया।
तुम खो गये कहाँ पे राधा को यूँ भुलाके।
वो धुन कहाँ-

आँखे भी थक गई है अब इंतजार करके।
आजाओ हे कन्हैया मथुरा से फिर निकल के।
चित को चुराने वाले आके गले लगाले।
वो धुन कहाँ से-

नेहा लगा कान्हा  क्यूँ हो गये पराये।
आवन को कह गये थे क्यूँ अब तलक न आये।
कैसी ये प्रीत तेरी आके जरा बतादे।
वो धुन कहाँ से-

पूनम की रात कान्हा  तूने रास थे रचाये।
और वो कदंब की छैया झूला भी थे झुलाये।
कैसे तुझे भुलाऊँ    कोई रास्ता बता  दे।

वो धुन कहाँ से पाऊँ  मुरली बजाने वाले।
प्राणों में  जो बसे हैं वो आज फिर सुनादे ।

केवरा यदु "मीरा"

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