तेंहा उमड़के आबे रे करिया बादर
गिंजरके हमर गांव म बनके रे चमगादर
मेंहा चढ़ाहूं तोला फूल पान नरियर
धरती दाई ल तेंहा कर देबे हरियर
छत्तीसगढ़ के कोरा ल झन भुलाबे
नेवता नेवतथों आबे तेंहा सादर
तेंंहा उमड़के आबे.......
पहिली अषाढ़ म रहिथे तोर अगोरा
तोर बिना कईसे मनाबो तीजा पोरा
चारों कोति नदियां,तरिया,डबरा म पानी भर जाथे
त लोग लईका सियानमन करथे तोर आदर
तेंहा उमड़के आबे......
घाम नई जनावन देवस सबला देथस छईंहा
मोला बतादे कोन बेरा म आबे रे सुरबईहा
बिजली मारत गरजत बरसत तेंहा आबे
हमन ओढ़े रहिबो तानके करिया चादर
तेंहा उमड़के आबे.......
सबोझिनबर मया ल बरोबर बरसाबे
कभु कोनो जीव ल तेंहा झिन तरसाबे
तिहीं हमर दाई-ददा तिहीं हमर मनके सगा
जग म कहिथे तोला रे गॉड फादर
तेंहा उमड़के आबे........
*रचनाकार-गुणेन्द्र सिंह पोर्ते "अविराम" फिन्गेश्वर गरियाबंद छत्तीसगढ़*
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