Wednesday, May 29, 2019

नारी- by अनिता सुभाष देशमुख

नारी बिन नर का अस्तित्व अधूरा है,
नारी से ही मानव जीवन होता पूरा है

माँ भी है नारी,बहन भी है नारी
हर दर्द को करती सहन भी है नारी।

बेटी बनकर जो गुलजार करती है अपने घर को,
बन बहु तरसती है माँ बाप सा प्रेम पाने उम्र भर को।

दुख में भी अपनी आँसू पीती है नारी,
हर जख्म को अंदर से सीती है नारी।

कभी बन राधा प्रेम में बिछोह होता,
कभी बन सीता अग्नि में उतरती है।
जुड़ें सारे रिश्तों के,
प्रेममयी व्यवहार से ही नारी संवरती है।

धन दौलत की चाह नही रखती कभी,
बस एक सम्मान को तरसती है नारी,
होता अपमान चाहे लाखो बार,
न कभी फिर भी बरसती है नारी।

प्रेम मिले जहाँ उस आंगन को,
स्वर्ग बना देती है नारी,
कांटो के चादर को भी मखमली स्वर्ण बना देती है नारी।

सारी ख़्वाहिशों को अपनी,
दमन कर जाती है नारी,
खुद तपकर आग में पूरी,
हर वचन कर जाती है नारी।
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....✍️ अनिता सुभाष देशमुख

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