जिला, राजनांदगांव
राज्य, छःगः,
विषय, आदर्श,
शीर्षक,आदर्श,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर 9165674670
आदर्श एक सरल कठिन कृपान है।
तप त्याग धीरज अपनों की बलिदान है ।।
अपना न पराया कोई जग बलिहार है ।
सोते को जागते हुए सुनहरा प्रकाश है ।।
कर्म से विमुख नहीं ऐसा एक भाल है ।
असंभव भी संभव हुए न कोई सवाल है।।
डूबते हुए नईया की वह तो खेवन हार है ।
रूप न बदले कोई ना ही कोई चाल है ।।
सीधे-साधे भोले भाले यही पहचान है ।
जिस ढांचे में जाये बस उसी के समान है।।
न मान अपमान कोई न ही कोई तृष्णा ।
भला हो भलाई सबका बस यही तृष्णा ।।
कर्मयोगी धर्म योगी योगियों का योग है ।
छप्पंन प्रसादी में से एक महा भोग है ।।
अमर है गाथा उनके अमर है ज्वाला ।
आदर्श की प्रतीक देखो सूरज है निराला।।
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