Wednesday, August 7, 2024

राजनांदगांव से ललित कुमार यदु की रचना- आदर्श

कवि श्री ललित कुमार यदु
जिला, राजनांदगांव
राज्य, छःगः,
विषय, आदर्श,
शीर्षक,आदर्श,
विधा कविता,
मोबाइल नंबर 9165674670

आदर्श एक सरल कठिन  कृपान है।
 तप त्याग धीरज अपनों की बलिदान है ।।
अपना न पराया कोई जग बलिहार है ।
सोते को जागते हुए  सुनहरा प्रकाश है ।।
कर्म से विमुख नहीं ऐसा एक भाल है ।
असंभव  भी संभव हुए न कोई  सवाल है।।
 डूबते हुए नईया की  वह तो खेवन हार है ।
रूप न बदले कोई ना ही कोई चाल है ।।
सीधे-साधे भोले भाले यही पहचान है ।
जिस ढांचे में जाये बस उसी के समान है।। 
न मान अपमान कोई न ही कोई तृष्णा ।
भला हो भलाई सबका बस यही तृष्णा ।।
कर्मयोगी धर्म योगी योगियों का योग है ।
छप्पंन   प्रसादी में से एक महा भोग  है ।।
अमर है गाथा उनके अमर है ज्वाला ।
आदर्श की प्रतीक  देखो सूरज है निराला।।

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