ब्लॉक--आरंग
जिला --रायपुर
राज्य --छत्तीसगढ़
विषय- कविता
शीर्षक - प्रकृति
विधा--गीत/छंदमुक्त
मो.-९७५३१६४८८५
दिनांक -0६जुलाई
*प्रकृति*
नदियों से निर्मल पानी बहना चाहिए।
मानवीय दोहन अत्याचार नहीं होना चाहिए।
पहाड़ों से औषधि हमें जरुर चाहिए।
रत्नों को क्या करेंगे हमें तो पुरुषोत्तम राम चाहिए।
पेड़ों की हमें हरियाली वृहद छाया चाहिए।
जरुरत जितना इमारती उतना चाहिए।
खेतों में अन्न उगाना फसल उतना चाहिए।
कमरतोड़ मेहनत नगद आलस नहीं चाहिए।
खिलवाड़ प्रकृति से हमें नहीं चाहिए।
दोहित प्रकृति नहीं नई दुल्हन चाहिए।
सब कुछ दे रही प्रकृति अपना हिसाब चाहिए।
मानवीय दोहन को रोको सभी में समझ चाहिए।
सूरज अपनी नित्य क्रिया करता सीख चाहिए।
चन्द्रमा में शीतलता सभी को शीतलता चाहिए।
मिलकर संकल्प लें लो स्वच्छ प्रकृति चाहिए।
दुखों का न अम्बार होगा सुख चैन चाहिए।
वचन बद्ध हो मानव जीवन सुखद चाहिए।
प्रकृति में विकृत बिल्कुल भी नहीं चाहिए।
होगा संसार में सुख मुझे तो सिर्फ यही चाहिए।
हरमन काव्य हर मन को पढ़ना चाहिए।
क्या लाये थे पुछो स्वमन से किसको क्या चाहिए?
अपार सुख प्रकृति से मिलती बस प्यार चाहिए।
प्यार के भूखे संसार है बस प्यार चाहिए।
प्रकृति में तांडव करे दानव को रोकना चाहिए।
कुछ हम सोचे कुछ तो आपको भी सोचना चाहिए।
सोच सार्थक हरमन में हर मन होना चाहिए।
भला कौन चाहता है अपना परहित चाहिए।
कुदरत की असीम कृपा सभी को चाहिए।
अनुग्रहित करों प्रकृति को ऐसा हृदय चाहिए।
प्रकृति की अनगिनत पहलू सुरक्षा चाहिए।
सरयू,ताल,झील,पर्वत,सभी सशक्त मार्ग चाहिए।
शीतलता, उष्णता,ओले,बरखा,दिन-रात चाहिए।
प्राप्त सुख इसी में बस प्रकृति चाहिए, प्रकृति चाहिए.......
रचनाकार/कलमकार
हरमन कुमार बघेल
*(हरमन)*
आरंग जिला-रायपुर
छत्तीसगढ़
9753164885
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