Monday, July 29, 2024

सारंगढ़-बिलाईगढ़ से लोकनाथ ताण्डेय 'मधुर' की रचना- गुरु पूर्णिमा

कवि - लोकनाथ ताण्डेय 'मधुर'
जिला -सारंगढ़ -बिलाईगढ़
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - गुरु पूर्णिमा
विधा- छंद(कुंडलियां छंद)

गुरुवर गुण की खान है, गुरु बिन मिले न ज्ञान।
गुरु ही तारणहार हैं, गुरु सम कौन महान।
गुरु सम कौन महान, जगत नतमस्तक सारा।
देकर ज्ञान प्रकाश, करे जीवन उजियारा।
ज्यों छाया फल-फूल, सभी को देते तरुवर।
वैसे ही सब ज्ञान, शिष्य को देते गुरुवर।।
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